
धारा 5 – विवादित तथ्यों और प्रासंगिक तथ्यों पर गवाही
किसी भी वाद/मुकदमे में केवल दो प्रकार के तथ्यों पर ही गवाही दी जा सकती है—
- विवादित तथ्य (Facts in Issue)
- वे अन्य तथ्य जिन्हें इस अधिनियम के अनुसार प्रासंगिक घोषित किया गया है (Relevant Facts)
स्पष्टीकरण
यदि किसी अन्य कानून – विशेषकर सिविल प्रक्रिया – के अनुसार किसी तथ्य को साबित करना वर्जित है, तो वह यहाँ भी साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उदाहरण
- यदि A ने B पर कुल्हाड़ी से प्रहार किया और इरादा हत्या का था—
- प्रहार का तथ्य
- इस प्रकार प्रहार से मृत्यु होना
- मारने का इरादा
—सभी विवादित / प्रासंगिक तथ्य हैं।
- सिविल मुकदमे में वादी अपना बंधपत्र पहली सुनवाई में पेश नहीं करता, तो बाद की आपराधिक कार्यवाही में भी वह इसे साबित नहीं कर सकता।
धारा 6 – उसी घटना (Transaction) का भाग बनने वाले तथ्य (Res Gestae)
ऐसे सभी तथ्य, जो मुख्य घटना से इतने जुड़े हों कि वे उसी घटना का हिस्सा प्रतीत हों, प्रासंगिक हैं।
उदाहरण
- A ने B को पीटकर हत्या की—
पिटाई से पहले, दौरान, या तुरंत बाद उपस्थित लोगों द्वारा कही/की गई बातें और गतिविधियाँ ग्राह्य हैं। - कई व्यक्तियों को क्रमिक रूप से माल भेजा गया—
हर वितरण एक ही लेन-देन का हिस्सा माना जाएगा।
धारा 7 – कारण, प्रभाव तथा प्रसंग (Occasion, Cause & Effect)
किसी घटना के कारण, परिणाम, पृष्ठभूमि, या प्रभाव से संबंधित तथ्य प्रासंगिक हैं।
उदाहरण: हत्या के बाद मृतक के कपड़ों पर खून, हथियार पर उँगलियों के निशान आदि।
धारा 8 – तैयारी (Preparation), कारण (Motive) और व्यवहार/आचरण (Conduct)
- वह तथ्य जो किसी अपराध की तैयारी या कारण को दर्शाए—प्रासंगिक।
- अभियुक्त/वादी/गवाह का पूर्व या अनुवर्ती आचरण भी प्रासंगिक है।
स्पष्टीकरण 1
केवल कथन (statement) आचरण नहीं है, जब तक वह किसी कार्य के साथ जुड़ा न हो।
स्पष्टीकरण 2
यदि कोई आचरण प्रासंगिक है, तो उससे संबंधित कथन भी प्रासंगिक माना जाएगा।
उदाहरण
- A पर B को जहर देने का आरोप —
यह तथ्य कि A ने वही विष खरीदा था—प्रासंगिक। - लूट के बाद आरोपी का पुलिस आने की बात सुनकर भाग जाना—प्रासंगिक।
- चेतावनी पत्र पाकर आरोपी का फरार हो जाना—प्रासंगिक।
धारा 24 – धमकी/प्रलोभन/वादे के तहत स्वीकारोक्ति अवैध
अभियुक्त की स्वीकारोक्ति तब अवैध होगी जब—
- वह धमकी, प्रलोभन या वादे के कारण की गई हो
- और यह बात किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की गई हो जिसके पास अधिकार/प्रभाव हो
धारा 25 – पुलिस अधिकारी के समक्ष स्वीकारोक्ति अवैध
किसी भी पुलिस अधिकारी के सामने की गई स्वीकारोक्ति अदालत में अमान्य है।
धारा 26 – पुलिस अभिरक्षा में स्वीकारोक्ति
पुलिस कस्टडी में की गई स्वीकारोक्ति तभी वैध होगी जब वह मजिस्ट्रेट के सामने की जाए।
धारा 27 – सूचना के आधार पर बरामदगी
पुलिस कस्टडी में आरोपी द्वारा दी गई जानकारी में से केवल उतना हिस्सा स्वीकार्य होता है जिससे किसी चीज़ की बरामदगी (Discovery) होती है।
धारा 28 – प्रलोभन/धमकी समाप्त होने के बाद स्वीकारोक्ति
यदि धमकी/प्रलोभन का प्रभाव समाप्त हो चुका हो, उसके बाद दी गई स्वीकारोक्ति वैध है।
धारा 29 – अन्यथा वैध स्वीकारोक्ति
स्वीकारोक्ति केवल इसलिए अस्वीकार्य नहीं होगी कि—
- उसे धोखे से लिया गया
- गोपनीयता का वादा किया गया
- नशे की हालत में उत्तर दिया गया
यदि वह कानूनन अन्यथा वैध है, तो स्वीकार की जाएगी।
धारा 30 – सहअभियुक्त की स्वीकारोक्ति (Joint Trial)
यदि दो या अधिक अभियुक्तों पर साझा मुकदमा चल रहा है और उनमें से कोई एक स्वीकारोक्ति करता है—
तो अदालत उस स्वीकारोक्ति को अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध भी विचार में ले सकती है।
उदाहरण
- A और B पर G की हत्या का संयुक्त ट्रायल →
A की स्वीकारोक्ति “मैं और B ने मिलकर हत्या की”—
B के विरुद्ध भी विचार योग्य।
धारा 32 – मृत्यु से पूर्व कथन (Dying Declaration) एवं अन्य परिस्थितियाँ
निम्न स्थितियों में मृत, लापता, या असमर्थ व्यक्ति द्वारा किया गया कथन प्रासंगिक है—
- मृत्यु के कारण/परिस्थिति से संबंधित कथन (Dying Declaration)
- व्यक्ति लापता हो
- विदेश में हो
- साक्ष्य देने में असमर्थ हो
मरते समय व्यक्ति “मृत्यु का भय” में था या नहीं — यह आवश्यक नहीं।
धारा 45 – विशेषज्ञ की राय (Expert Opinion)
निम्न विषयों पर विशेषज्ञ की राय प्रासंगिक—
- विदेशी कानून
- विज्ञान
- हस्तलिपि (Handwriting)
- फिंगरप्रिंट
धारा 47 – हस्तलिपि के बारे में सामान्य ज्ञान
जिस व्यक्ति को किसी दूसरे व्यक्ति की लिखावट का सामान्य ज्ञान हो, उसकी राय प्रासंगिक होती है।
उदाहरण:
व्यापारी का क्लर्क, दलाल, बार-बार पत्राचार करने वाला व्यक्ति आदि।
धारा 133A – विवाहित महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने की उपधारणा
यदि—
- महिला ने विवाह के 7 वर्ष के भीतर आत्महत्या की
- और पति/ससुराल वालों द्वारा क्रूरता सिद्ध है
तो अदालत उपधारणा कर सकती है कि उन्होंने आत्महत्या के लिए उकसाया।
धारा 114 – सामान्य अनुभव के आधार पर उपधारणाएँ
न्यायालय सामान्य अनुभव, मानव स्वभाव, और प्राकृतिक क्रम के अनुसार कुछ तथ्यों की उपधारणा (Presumption) कर सकता है।
उदाहरण:
- चोरी के तुरंत बाद चोरी का सामान जिसके पास पाया जाए, उसे चोर माना जा सकता है।
- परिस्थितियों पर निर्भर होकर 24 घंटे से अधिक अवधि भी स्वीकार्य हो सकती है।
धारा 114A – बलात्कार मामलों में सहमति की उपधारणा
IPC की धारा 376(2) के तहत—
यदि संभोग सिद्ध है और पीड़िता कहती है कि सहमति नहीं थी—
तो अदालत मान लेगी कि सहमति नहीं थी।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
धारा 6
धारा 25 के अनुसार, पुलिस दबाव का जोखिम होता है, इसलिए स्वीकारोक्ति अस्वीकार्य है।
धारा 32(1)
केवल तब जब संयुक्त ट्रायल चल रहा हो — धारा 30
धारा 45
