अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अपराध निवारण) अधिनियम, 1989: एक विस्तृत जानकारी
भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार देता है। संविधान के निर्माता भली-भांति जानते […]
भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार देता है। संविधान के निर्माता भली-भांति जानते […]
कानून किसी भी सभ्य समाज की रीढ़ होता है। यह न केवल लोगों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि
हिंदू कानून हिंदू कानून विश्व का सबसे प्राचीन और सर्वाधिक प्रचलित कानून माना जाता है। यह लगभग 6000 वर्ष पुराना
भारत एक विविध संस्कृति वाला देश है जहां विभिन्न धर्मों के लोगों को अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाज़ों के अनुसार जीवन जीने का
आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में व्यवसायों का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है। लेकिन जब लाभ कमाने की दौड़ में
कानून (Law) समाज को अनुशासन में रखने और न्याय सुनिश्चित करने का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। कानून के बिना समाज
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में कानून केवल एकरूप नहीं हो सकते।हर समुदाय की अपनी परंपराएँ, रीति-रिवाज और धार्मिक मान्यताएँ हैं।
भारत एक विविधतापूर्ण देश है, जहाँ धर्म और परंपराओं के अनुसार गोद लेने (Adoption) और संरक्षकता (Guardianship) के अलग-अलग कानून
परिचय: बाल विवाह — एक सामाजिक बुराई भारत जैसे देश में विवाह को पवित्र संस्था माना जाता है, लेकिन जब
भारत का न्यायिक ढाँचा (Judicial System of India) एक सुव्यवस्थित पिरामिड के समान है। इस पिरामिड के शीर्ष पर सर्वोच्च